स्मार्ट सिटी योजना के तहत वैपर लैंप की जगह लगाई गई थीं एलइडी लाइट्स,
संत हिरदाराम नगर.
संतनगर की सड़कों को रोशन करने के लिए स्मार्ट सिटी डेवलपमेंट कॉरपोरेशन ने एलइडी लाइट्स से खंभों को लैस करने के लिए लाखों रुपए खर्च कर किए, पर ये एलइडी लाइट्स सफेद हाथी साबित हो रही हैं। जिन खंभों से वैपर लैंप हटाकर इन्हें लगाया गया था, वे महज कुछ दिन ही रोशनी दे सके। हालात ये हैं कि संतनगर में ज्यादातर स्ट्रीट लाइट्स बंद हो गई हैं जिससे संतनगर की अधिकंाश सड़कों पर अंधेरा पसरा रहता है। रहवासियों का आरोप है कि रहवासी क्षेत्रों समेत मुख्य मार्गों पर नगर निगम ने एलइडी लाइट लगाई थी, इसके लिए उन वैपर लैंप्स और ट्यूबलाइट्स को भी हटाया गया था, जिनसे कम ही पर रोशनी तो मिलती थी, पर एलइडी लाइट पूरी तरह बंद हो गई हैं। खास बात है कि नगर निगम अधिकारियों से शिकायत करने के बाद भी हालात जस के तस बने हुए हैं। अंधेरे में डूबी रहने वाली सड़कें बारिश में और भी खतरनाक हो गई हैं। यहां स्मार्ट सिटी योजना के तहत खंभों पर दो महीने पहले एलइडी लाइट्स लगाई थीं, पर कुछ दिन तो लाइट जलीं पर समय के साथ इन्होंने दम तोड़ दिया।
महकमों के बीच उलझी सुविधा
स्मार्ट सिटी योजना के तहत संतनगर में स्ट्रीट लाइट को एलइडी से लैस किया गया था। इन खंभों पर पहले लगे वैपर लैंप और ट्यूबलाइट्स लगाने का जिम्मा नगर निगम के पास था। साथ ही इन्हें चालू और बंद करने का दायित्व विद्युत वितरण कंपनी उठाती थी। स्मार्ट सिटी डेवलपमेंट कॉरपोरेशन को स्ट्रीट लाइट का जिम्मा सौंपा गया और इसके बाद से कई स्ट्रीट लाइट शोपीस बनकर रह गई हैं।
शिकायत पर नहीं होती सुनवाई
रहवासियों का आरोप है कि नगर निगम में शिकायत करने पर सुनवाई नहीं होती है। वहीं १८१ पर भी कई बार शिकायत दर्ज कराई गई है, पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। नतीजतन रहवासी क्षेत्रों की सड़कें कई दिनों से अंधेरे में डूबी हुई हैं। रहवासियों का कहना है कि नगर निगम अधिकारी इसे अपने कार्यक्षेत्र से बाहर का मामला बताकर पल्ला झाड़ लेते हैं।
एलइडी लाइट्स ने तोड़ा दम, सड़कों पर पसरा अंधियारा